Saturday, 24 June 2017

संस्कार

"संस्कार" *
एक पार्क में दो बुजुर्ग बैठे बातें कर रहे थे ...।
पहला :— मेरी एक पोती है
शादी के लायक है बी.ई. किया है,
जॉब करती है,। कद 5' 2" इंच है,
सुन्दर है , कोई लड़का नजर में हो
तो बताइयेगा ..।
दूसरा :— आपकी पोती को
किस तरह का परिवार चाहिये..?
पहला :— कुछ खास नहीं ...
लडका एम.ई./एम.टेक. किया हो,
अपना घर हो, कार हो, घर में
एसी हो, अपना बाग बगीचा हो
अच्छा जॉब, अच्छी सैलरी, कोई
लाख रू. तक हो ...!
दूसरा :— और कुछ..इन सब
के अलावा... ?
पहला :— हाॅॅं ...सबसे ज़रूरी बात, अकेला होना चाहिये ... माँ -बाप, भाई - बहन नहीं होने चाहिये, वो क्या है लड़ाई - झगड़े होते है ...!
दूसरे की आँखें भर आईं ...।
फिर
आँसू पोंछते हुए बोले :— मेरे एक दोस्त का पोता है उसके भाई - बहन नहीं हैं, माँ-बाप एक एक्सीडेंट में चल बसे, अच्छी जॉब है डेढ़ लाख सैलरी है, गाड़ी है बंगला है, मगर उसकी भी यही शर्त है लड़की वालों के भी माँ -बाप, भाई बहन या कोई रिश्तेदार ना हों, कहते-कहते उनका गला भर आया ...।
फिर बोले :— अगर आपका परिवार आत्म हत्या कर ले तो बात बन सकती है आपकी पोती की शादी उससे हो जाएगी और वो बहुत सुखी रहेगी.।
पहला :— ये कया बकवास है ...। हमारा परिवार क्यों आत्म हत्या करे ... ?
कल को उसकी खुशियों में, दुख में कौन उसके साथ, उसके पास होगा ...?
दूसरा :— वाह मेरे दोस्त...
खुद का परिवार, परिवार, और
दूसरे का कुछ नहीं,।
मेरे दोस्त अपने बच्चों को परिवार का महत्व समझाओ ...।
घर के बड़े, घर के छोटे सभी
अपनों के लिए जरूरी होते हैं,।
वरना इंसान खुशियों का और गम
का महत्व ही भूल जाएगा,ज़िन्दगी
नीरस बन जाएगी ।.
पहला बुजुर्ग अब बेहद
शर्मिंदा हुआ । ,
परिवार है तो जीवन में हर खुशी, खुशी लगती है, अगर परिवार नहीं तो किससे अपनी खुशियाँ और गम बाँटेंगे.।
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